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भोपाल में कचरे से पटी सड़कें: चार सौ गाड़ियां खड़ी, सफाईकर्मियों की हड़ताल के बीच व्यापारी खुद उतरे मैदान में
Thu, 05 Nov 2026 01:50 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Thu, 05 Nov 2026 01:50 PM IST
सार
भोपाल में सफाईकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से लगातार दूसरे दिन घरों और बाजारों से कचरा नहीं उठा। सड़कों, गलियों और बाजारों में कचरे के ढेर लगने से गंदगी और बदबू फैल रही है। कर्मचारी 25 हजार रुपये न्यूनतम वेतन, नियमितीकरण और ठेका प्रथा खत्म करने सहित 18 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
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शहर में फैला कचरा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दीपावली की तैयारियों के बीच राजधानी भोपाल में सफाई व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ा गई है। सफाईकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते लगातार दूसरे दिन घरों से कचरा नहीं उठा। सड़कों, गलियों, बाजारों और दुकानों के बाहर कचरे के ढेर लगने लगे हैं। कहीं प्लास्टिक और पॉलीथिन उड़कर सड़कों पर फैल रही है तो कहीं सब्जियों और फलों के सड़ने वाले कचरे से बदबू फैल रही है। कचरा जमा होने से नालियों के आसपास भी गंदगी बढ़ रही है। त्योहार के लिए बाजारों में उमड़ रही भीड़ के बीच यह स्थिति लोगों और व्यापारियों के लिए परेशानी बन गई है। शहर में सफाई व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति के बीच अब व्यापारी संगठन भी सामने आने लगे हैं। कोटरा क्षेत्र में व्यापारियों ने खुद सफाई की जिम्मेदारी संभाली। व्यापारी सड़कों पर उतरकर झाड़ू लगा रहे हैं और दुकानों के आसपास जमा कचरे को समेट रहे हैं। साथ ही दूसरे दुकानदारों को भी समझा रहे हैं कि जब तक सफाईकर्मियों की हड़ताल चल रही है, तब तक अपने प्रतिष्ठानों से निकलने वाला कचरा बोरियों में भरकर सुरक्षित रखें, ताकि वह सड़क पर न फैले।
400 से ज्यादा कचरा गाड़ियां खड़ी, रोज निकलता है 900 टन कचरा
सफाईकर्मियों की हड़ताल का सबसे बड़ा असर डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन पर पड़ा है। भोपाल में नगर निगम की 400 से अधिक कचरा गाड़ियों के पहिये थमने की जानकारी सामने आई है। इन गाड़ियों के माध्यम से घरों और प्रतिष्ठानों से कचरा एकत्रित कर गार्बेज ट्रांसफर स्टेशनों तक पहुंचाया जाता है। वहां से कचरा आदमपुर छावनी स्थित डंपिंग साइट भेजा जाता है। सामान्य दिनों में भोपाल से रोजाना करीब 850 से 900 टन कचरा निकलता है। दीपावली के दौरान घरों में सफाई और बाजारों में बढ़ी गतिविधियों के कारण यह मात्रा करीब एक हजार टन प्रतिदिन तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे समय में कचरा संग्रहण व्यवस्था ठप होने से स्थिति और गंभीर हो सकती है। न्यू मार्केट, बिट्टन मार्केट, एमपी नगर, चौक बाजार, नवबहार सब्जी मंडी और बैरागढ़ सहित कई प्रमुख बाजारों में कचरा जमा होने की समस्या सामने आई है। रिहायशी इलाकों में भी घरों से कचरा नहीं उठने के कारण लोगों को परेशानी हो रही है।
18 सूत्रीय मांगों को लेकर सफाईकर्मियों का आंदोलन
सफाईकर्मी अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस ट्रेड यूनियन (7262) के बैनर तले तीन नवंबर को भोपाल के शाहजहांनी पार्क में प्रदेशभर के कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया था। इसमें 57 जिलों से कर्मचारी और संगठन के पदाधिकारी शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने जहांगीराबाद चौराहे पर जाम लगाकर विरोध जताया था। कर्मचारी मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देना चाहते थे, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के मौके पर नहीं पहुंचने से नाराजगी बढ़ गई। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर कर्मचारियों को आगे बढ़ने से रोका। इसके बाद कर्मचारी सड़क पर बैठ गए। बाद में समझाइश के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ, लेकिन आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया गया।चार नवंबर से प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन काम बंद हड़ताल शुरू कर दी गई।
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ये हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
सफाईकर्मियों का न्यूनतम मासिक वेतन 25 हजार रुपये किया जाए।
लंबे समय से काम कर रहे दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाए।
ठेका प्रथा और आउटसोर्स व्यवस्था समाप्त की जाए।
समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए।
पुरानी पेंशन या सुरक्षित पेंशन व्यवस्था का लाभ मिले।
कर्मचारी की मृत्यु होने पर परिवार के सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।
समय पर वेतन भुगतान और कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।
कर्मचारियों को पदोन्नति और अन्य सेवा संबंधी सुविधाएं दी जाएं।
अधिकारियों से दो घंटे चर्चा, नहीं निकला समाधान
हड़ताल खत्म कराने के लिए चार नवंबर को नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे और नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे ने कर्मचारी नेताओं के साथ करीब दो घंटे चर्चा की। हालांकि, इस बातचीत में कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन जारी रखने की बात कही। कर्मचारियों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि मांगों पर निर्णय नहीं हुआ तो दीपावली के दौरान भी सफाई और कचरा उठाने का काम नहीं किया जाएगा। यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट का कहना है कि कर्मचारी लंबे समय से मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस निर्णय नहीं हुआ। तीन नवंबर को सरकार को अंतिम ज्ञापन दिया गया था। मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी।
कोटरा में व्यापारियों ने खुद उठाई झाड़ू, बोले- कचरा बोरियों में भरकर रखें
शहर में सफाई व्यवस्था बिगड़ने के बीच कोटरा व्यापारी संघ ने अनूठी पहल की है। क्षेत्र में लगने वाले बड़े साप्ताहिक हाट बाजार के बाद भारी मात्रा में कचरा जमा हो गया था। बुधवार को यहां सब्जी और फल विक्रेताओं की दुकानें लगने के कारण बड़ी मात्रा में गीला और सूखा कचरा फैला हुआ था। हड़ताल के चलते इसका उठाव नहीं हो सका। ऐसे में व्यापारी खुद सड़क पर उतरे और सफाई अभियान शुरू कर दिया। कोटरा व्यापारी संघ के अध्यक्ष कमलेश खातरकर ने बताया कि सफाईकर्मी रोजाना शहर की सफाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी जायज मांगों का व्यापारी भी समर्थन करते हैं। लेकिन त्योहार के समय बाजारों में कचरे का अंबार लगना ठीक नहीं है। इसलिए व्यापारियों ने खुद सफाई करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि दुकानों से निकलने वाला ज्यादातर कचरा सूखा होता है। यदि इसे व्यवस्थित तरीके से रखा जाए तो सड़क पर गंदगी फैलने से रोकी जा सकती है। व्यापारियों से अपील की जा रही है कि वे अपना कचरा बोरियों में भरकर रखें और सड़क पर न फेंकें। खातरकर ने बताया कि कोटरा में लगने वाले साप्ताहिक हाट में अलग-अलग क्षेत्रों से सब्जी और फल विक्रेता पहुंचते हैं। बुधवार को बाजार लगने के बाद यहां काफी कचरा जमा हो जाता है। इस बार सफाई नहीं होने से गंदगी का अंबार लग गया। दीपावली से पहले क्षेत्र को साफ रखने के लिए व्यापारी, रहवासी, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोग मिलकर अभियान चला रहे हैं।उन्होंने कहा कि दीपावली स्वच्छता और साफ-सफाई का त्योहार है। ऐसे में हमारा प्रयास है कि सभी मिलकर अपने क्षेत्र को गंदगी से मुक्त रखें। सफाईकर्मियों की मांगों का समर्थन अपनी जगह है, लेकिन जब तक उनकी हड़ताल चल रही है, तब तक हमें भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
यह भी पढ़ें-एमपी में बदलेगा मौसम: अब ठंड दिखाएगी तेवर, तेजी से गिर सकता है रात का पारा, धनतेरस-दिवाली पर खिली रहेगी धूप
अब दीपावली पर सफाई व्यवस्था बहाल करना चुनौती
भोपाल में सफाईकर्मियों की हड़ताल ऐसे समय हुई है, जब बाजारों में धनतेरस और दीपावली की खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। दुकानों, सब्जी मंडियों और बाजारों में सामान्य दिनों के मुकाबले अधिक कचरा निकल रहा है। ऐसे में नगर निगम के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ कर्मचारियों की मांगों का समाधान निकालना है, दूसरी तरफ शहर को कचरे और गंदगी से बचाना है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो त्योहार के दौरान सफाई व्यवस्था और बिगड़ सकती है।
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400 से ज्यादा कचरा गाड़ियां खड़ी, रोज निकलता है 900 टन कचरा
सफाईकर्मियों की हड़ताल का सबसे बड़ा असर डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन पर पड़ा है। भोपाल में नगर निगम की 400 से अधिक कचरा गाड़ियों के पहिये थमने की जानकारी सामने आई है। इन गाड़ियों के माध्यम से घरों और प्रतिष्ठानों से कचरा एकत्रित कर गार्बेज ट्रांसफर स्टेशनों तक पहुंचाया जाता है। वहां से कचरा आदमपुर छावनी स्थित डंपिंग साइट भेजा जाता है। सामान्य दिनों में भोपाल से रोजाना करीब 850 से 900 टन कचरा निकलता है। दीपावली के दौरान घरों में सफाई और बाजारों में बढ़ी गतिविधियों के कारण यह मात्रा करीब एक हजार टन प्रतिदिन तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे समय में कचरा संग्रहण व्यवस्था ठप होने से स्थिति और गंभीर हो सकती है। न्यू मार्केट, बिट्टन मार्केट, एमपी नगर, चौक बाजार, नवबहार सब्जी मंडी और बैरागढ़ सहित कई प्रमुख बाजारों में कचरा जमा होने की समस्या सामने आई है। रिहायशी इलाकों में भी घरों से कचरा नहीं उठने के कारण लोगों को परेशानी हो रही है।
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18 सूत्रीय मांगों को लेकर सफाईकर्मियों का आंदोलन
सफाईकर्मी अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस ट्रेड यूनियन (7262) के बैनर तले तीन नवंबर को भोपाल के शाहजहांनी पार्क में प्रदेशभर के कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया था। इसमें 57 जिलों से कर्मचारी और संगठन के पदाधिकारी शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने जहांगीराबाद चौराहे पर जाम लगाकर विरोध जताया था। कर्मचारी मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देना चाहते थे, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के मौके पर नहीं पहुंचने से नाराजगी बढ़ गई। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर कर्मचारियों को आगे बढ़ने से रोका। इसके बाद कर्मचारी सड़क पर बैठ गए। बाद में समझाइश के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ, लेकिन आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया गया।चार नवंबर से प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन काम बंद हड़ताल शुरू कर दी गई।
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ये हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
सफाईकर्मियों का न्यूनतम मासिक वेतन 25 हजार रुपये किया जाए।
लंबे समय से काम कर रहे दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाए।
ठेका प्रथा और आउटसोर्स व्यवस्था समाप्त की जाए।
समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए।
पुरानी पेंशन या सुरक्षित पेंशन व्यवस्था का लाभ मिले।
कर्मचारी की मृत्यु होने पर परिवार के सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।
समय पर वेतन भुगतान और कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।
कर्मचारियों को पदोन्नति और अन्य सेवा संबंधी सुविधाएं दी जाएं।
अधिकारियों से दो घंटे चर्चा, नहीं निकला समाधान
हड़ताल खत्म कराने के लिए चार नवंबर को नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे और नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे ने कर्मचारी नेताओं के साथ करीब दो घंटे चर्चा की। हालांकि, इस बातचीत में कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन जारी रखने की बात कही। कर्मचारियों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि मांगों पर निर्णय नहीं हुआ तो दीपावली के दौरान भी सफाई और कचरा उठाने का काम नहीं किया जाएगा। यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट का कहना है कि कर्मचारी लंबे समय से मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस निर्णय नहीं हुआ। तीन नवंबर को सरकार को अंतिम ज्ञापन दिया गया था। मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी।
कोटरा में व्यापारियों ने खुद उठाई झाड़ू, बोले- कचरा बोरियों में भरकर रखें
शहर में सफाई व्यवस्था बिगड़ने के बीच कोटरा व्यापारी संघ ने अनूठी पहल की है। क्षेत्र में लगने वाले बड़े साप्ताहिक हाट बाजार के बाद भारी मात्रा में कचरा जमा हो गया था। बुधवार को यहां सब्जी और फल विक्रेताओं की दुकानें लगने के कारण बड़ी मात्रा में गीला और सूखा कचरा फैला हुआ था। हड़ताल के चलते इसका उठाव नहीं हो सका। ऐसे में व्यापारी खुद सड़क पर उतरे और सफाई अभियान शुरू कर दिया। कोटरा व्यापारी संघ के अध्यक्ष कमलेश खातरकर ने बताया कि सफाईकर्मी रोजाना शहर की सफाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी जायज मांगों का व्यापारी भी समर्थन करते हैं। लेकिन त्योहार के समय बाजारों में कचरे का अंबार लगना ठीक नहीं है। इसलिए व्यापारियों ने खुद सफाई करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि दुकानों से निकलने वाला ज्यादातर कचरा सूखा होता है। यदि इसे व्यवस्थित तरीके से रखा जाए तो सड़क पर गंदगी फैलने से रोकी जा सकती है। व्यापारियों से अपील की जा रही है कि वे अपना कचरा बोरियों में भरकर रखें और सड़क पर न फेंकें। खातरकर ने बताया कि कोटरा में लगने वाले साप्ताहिक हाट में अलग-अलग क्षेत्रों से सब्जी और फल विक्रेता पहुंचते हैं। बुधवार को बाजार लगने के बाद यहां काफी कचरा जमा हो जाता है। इस बार सफाई नहीं होने से गंदगी का अंबार लग गया। दीपावली से पहले क्षेत्र को साफ रखने के लिए व्यापारी, रहवासी, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोग मिलकर अभियान चला रहे हैं।उन्होंने कहा कि दीपावली स्वच्छता और साफ-सफाई का त्योहार है। ऐसे में हमारा प्रयास है कि सभी मिलकर अपने क्षेत्र को गंदगी से मुक्त रखें। सफाईकर्मियों की मांगों का समर्थन अपनी जगह है, लेकिन जब तक उनकी हड़ताल चल रही है, तब तक हमें भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
यह भी पढ़ें-एमपी में बदलेगा मौसम: अब ठंड दिखाएगी तेवर, तेजी से गिर सकता है रात का पारा, धनतेरस-दिवाली पर खिली रहेगी धूप
अब दीपावली पर सफाई व्यवस्था बहाल करना चुनौती
भोपाल में सफाईकर्मियों की हड़ताल ऐसे समय हुई है, जब बाजारों में धनतेरस और दीपावली की खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। दुकानों, सब्जी मंडियों और बाजारों में सामान्य दिनों के मुकाबले अधिक कचरा निकल रहा है। ऐसे में नगर निगम के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ कर्मचारियों की मांगों का समाधान निकालना है, दूसरी तरफ शहर को कचरे और गंदगी से बचाना है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो त्योहार के दौरान सफाई व्यवस्था और बिगड़ सकती है।
