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मिलेट्स नहीं अब इस आटे की रोटी है चर्चा में, शुगर और वजन मैनेजमेंट में मिल सकती है मदद

Tue, 03 Nov 2026 12:19 PM IST
श्रुति गौड़ हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्रुति गौड़ Updated Tue, 03 Nov 2026 12:19 PM IST
सार

Which Flour Is Best for Weight Loss and Blood Sugar Control:  इस लेख में जानें कि मिलेट्स के अलावा कौन-सा आटा इन दिनों हेल्दी डाइट के लिए चर्चा में है और इसे रोजमर्रा के खानपान में शामिल करने से क्या फायदे हो सकते हैं

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Best Atta for Diabetics Which Flour Is Best for Weight Loss and Blood Sugar Control
किन लोगों को जौ का आटा खाने से बचना चाहिए? - फोटो : AI
Which Flour Is Best for Weight Loss and Blood Sugar Control:  आजकल लोग अपनी सेहत को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो रहे हैं। वजन बढ़ने और ब्लड शुगर की समस्या के बीच खानपान में हेल्दी विकल्पों की तलाश भी बढ़ गई है। यही वजह है कि मिलेट्स के साथ-साथ अब जौ का आटा भी लोगों के बीच चर्चा में है। 


जौ में बीटा-ग्लूकन नाम का घुलनशील फाइबर पाया जाता है, जो कोलेस्ट्रॉल कम करने और भोजन के बाद ब्लड शुगर में होने वाली बढ़ोतरी को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा इसमें मौजूद फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखने में सहायक हो सकता है, जिससे वजन मैनेजमेंट में मदद मिल सकती है। 

ऐसे में सवाल है कि क्या गेहूं की रोटी की जगह जौ की रोटी खाना फायदेमंद है? आइए जानते हैं जौ के आटे के पोषक तत्व, फायदे, सेवन का सही तरीका और किन लोगों को इसका सेवन करते समय सावधानी बरतनी चाहिए।

 
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किन लोगों को जौ का आटा खाने से बचना चाहिए? - फोटो : AI
जौ का आटा क्या है और इसमें कौन-से पोषक तत्व पाए जाते हैं?

जौ एक साबुत अनाज है, जिसका इस्तेमाल सदियों से भारतीय खानपान में किया जाता रहा है। जौ को पीसकर इसका आटा तैयार किया जाता है। इसमें फाइबर, प्रोटीन, विटामिन-B समूह और आयरन, मैग्नीशियम जैसे खनिज पाए जाते हैं।

जौ के आटे की सबसे खास बात इसमें मौजूद बीटा-ग्लूकन (Beta-Glucan) है। यह एक प्रकार का घुलनशील फाइबर है, जो पाचन और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है।

 
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किन लोगों को जौ का आटा खाने से बचना चाहिए? - फोटो : AI
 जौ के आटे की रोटी खाने के 5 फायदे

1. ब्लड शुगर मैनेजमेंट में मददगार

जौ में मौजूद बीटा-ग्लूकन भोजन के पाचन और कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण की गति को धीमा कर सकता है। इससे भोजन के बाद ब्लड शुगर में तेजी से होने वाली बढ़ोतरी को कम करने में मदद मिल सकती है।

2. वजन कम करने में सहायक

जौ के आटे में मौजूद फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद करता है। इससे बार-बार भूख लगने और जरूरत से ज्यादा खाने की आदत को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है।

3. पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद

जौ में मौजूद फाइबर आंतों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने और कब्ज की समस्या से राहत दिलाने में मदद कर सकता है। इसे पर्याप्त पानी और संतुलित डाइट के साथ खाना चाहिए।

4. कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद

जौ का बीटा-ग्लूकन घुलनशील फाइबर LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है। इससे हृदय स्वास्थ्य को लाभ मिल सकता है।

5. पोषण से भरपूर विकल्प

जौ में कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसे रोजमर्रा की डाइट में शामिल करने से साबुत अनाज और फाइबर का सेवन बढ़ाया जा सकता है।
 
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किन लोगों को जौ का आटा खाने से बचना चाहिए? - फोटो : AI

 क्या डायबिटीज के मरीज रोज जौ की रोटी खा सकते हैं?

डायबिटीज के मरीज संतुलित डाइट के हिस्से के रूप में जौ की रोटी खा सकते हैं। इसमें मौजूद घुलनशील फाइबर ब्लड शुगर मैनेजमेंट में मदद कर सकता है। हालांकि, जौ में भी कार्बोहाइड्रेट होता है, इसलिए इसकी मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है। डायबिटीज के मरीज अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें और भोजन के बाद ब्लड शुगर की प्रतिक्रिया पर नजर रखें।
 
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किन लोगों को जौ का आटा खाने से बचना चाहिए? - फोटो : AI

 किन लोगों को जौ का आटा खाने से बचना चाहिए?
  • सीलिएक बीमारी के मरीज: जौ में ग्लूटेन पाया जाता है, इसलिए सीलिएक बीमारी वाले लोगों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
  • ग्लूटेन संवेदनशीलता वाले लोग: जिन्हें ग्लूटेन से परेशानी होती है, उन्हें डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
  • पाचन संबंधी परेशानी वाले लोग: अधिक मात्रा में फाइबर लेने से शुरुआत में गैस या पेट फूलने की समस्या हो सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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