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कोटा: 16 साल की किशोरी के पेट से निकली 10 किलो की गांठें, बिना धुली सब्जियों से परजीवी पहुंचने की आशंका

Sun, 01 Nov 2026 11:15 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Sun, 01 Nov 2026 11:15 AM IST
सार

राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने जटिल ऑपरेशन कर 16 वर्षीय किशोरी के पेट से करीब 10 किलोग्राम वजन की छोटी-बड़ी कई सिस्ट निकाली हैं। किशोरी पेट दर्द से परेशान थी और शुरुआत में उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

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kota 16 year old girl 10 kg abdominal cysts removed unwashed vegetables parasite infection
(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सर्जरी विभाग की टीम ने एक जटिल ऑपरेशन कर 16 वर्षीय किशोरी के पेट से करीब 10 किलोग्राम वजन की कई गांठें निकाली हैं। पेट में तेज दर्द की समस्या से परेशान किशोरी को पहले एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन वहां राहत नहीं मिलने पर परिजन उसे न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले आए। यहां जांच के दौरान पेट में तरल पदार्थ से भरी बड़ी सिस्ट होने के संकेत मिले। डॉक्टरों के अनुसार, बिना धुली सब्जियां खाने से शरीर में पहुंचने वाले परजीवी भी पेट में ऐसी गांठें बनने का कारण हो सकते हैं। निकाली गई सिस्ट के नमूनों को बीमारी की सही प्रकृति का पता लगाने के लिए हिस्टोपैथोलॉजी जांच के लिए भेजा गया है।

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पेट में फैली थीं छोटी-बड़ी कई सिस्ट

ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों को किशोरी के पेट में छोटे और बड़े आकार की कई सिस्ट मिलीं। ये पूरे पेट में फैली हुई थीं और इनका कुल वजन करीब 10 किलोग्राम था। सिस्ट के कारण पेट के अंदरूनी अंगों पर भी दबाव पड़ रहा था। डॉक्टरों ने निकाले गए नमूनों को हिस्टोपैथोलॉजी विभाग में जांच के लिए भेजा है, ताकि बीमारी की प्रकृति और इसकी वजह की पुष्टि हो सके। डॉक्टरों के मुताबिक, बिना धुली सब्जियों के सेवन से परजीवी शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। ये परजीवी पेट में सिस्ट या गांठें बनने की वजह बन सकते हैं। हालांकि, इस किशोरी के मामले में बीमारी की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।

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ओवेरियन सिस्ट और कैंसर जैसी दिख रही थी स्थिति

शुरुआती जांच में डॉक्टरों को मामला ओवेरियन सिस्ट और बच्चेदानी के कैंसर जैसा लगा था। किशोरी का सीटी स्कैन कराया गया, लेकिन पेट में गांठों के बड़े आकार और उनके फैलाव के कारण अंदरूनी अंग स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहे थे। गांठों के दबाव से लीवर, किडनी और आंतें प्रभावित हो रही थीं। किशोरी की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने पहले उसे किसी उच्च चिकित्सा केंद्र में रेफर करने पर विचार किया था। हालांकि, बाद में स्थानीय स्तर पर ही जटिल ऑपरेशन करने की योजना बनाई गई। इसके बाद सर्जरी विभाग की टीम ने ऑपरेशन कर पेट से सभी गांठें निकालीं।

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डॉ. आरजी मीणा के नेतृत्व में हुई सर्जरी

इस जटिल ऑपरेशन को सर्जरी विभाग के प्रोफेसर एवं यूनिट हेड डॉ. आरजी मीणा के नेतृत्व में अंजाम दिया गया। शल्य चिकित्सा दल में डॉ. मनोज गुप्ता, डॉ. सुरेंद्र, डॉ. निखिल और डॉ. नवनीत शर्मा शामिल रहे।


वहीं, एनेस्थीसिया विभाग की ओर से डॉ. एससी दुलारा और डॉ. हंसराज ने ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉक्टरों की टीम ने मिलकर करीब 10 किलोग्राम वजन की सिस्ट निकालने की जटिल प्रक्रिया पूरी की। अब नमूनों की हिस्टोपैथोलॉजी जांच रिपोर्ट से बीमारी की वास्तविक प्रकृति का पता चल सकेगा।

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