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ककोड़ा मेला : स्वयं सहायता समूह की महिलाएं लगाएंगी अपने उत्पादों के स्टॉल

Mon, 02 Nov 2026 02:01 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 02 Nov 2026 02:01 AM IST
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Kakoda Mela: Women from self-help groups will set up stalls for their products.
बदायूं। रुहेलखंड के मिनी कुंभ के नाम से प्रसिद्ध ककोड़ा मेले में इस बार स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों के भी विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। विभाग ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। अधिकारियों के अनुसार, मेले में दस स्टॉल स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए आरक्षित किए जा रहे हैं। मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को इन उत्पादों को खरीदने का अवसर मिलेगा, जिससे महिलाओं को आर्थिक लाभ होगा।
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इन दस स्टॉलों पर हस्तनिर्मित उत्पाद, अचार, पापड़, मसाले, अगरबत्ती, टोकरी सहित अन्य स्थानीय उत्पाद उपलब्ध रहेंगे। इसके अलावा समूह की महिलाओं की ओर से बनाए गए कपड़े, सजावटी सामान और खाद्य पदार्थ भी बिक्री के लिए रखे जाएंगे।
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डीसी एनआरएलएम रवि प्रकाश सिंह ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें बड़े बाजार से जोड़ना है। ककोड़ा मेला जनपद का सबसे बड़ा मेला है, जहां कई जिलों से श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में महिलाओं के उत्पादों को व्यापक पहचान मिलेगी। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने इस निर्णय का स्वागत किया है।
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उन्होंने बताया कि कि मेले में स्टॉल लगने से उनके उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी। उनकी आय में वृद्धि होगी। इससे अन्य महिलाओं को भी समूह से जुड़ने और स्वरोजगार अपनाने की प्रेरणा मिलेगी। विभाग ने स्टॉल लगाने के लिए स्थान चिह्नित करने और अन्य व्यवस्थाएं करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। जल्द ही स्टॉल आवंटन की प्रक्रिया भी पूरी कर ली जाएगी।

खेत खाली करने के लिए किसान गन्ना और शकरकंद की फसल समेटने में जुटे
- यूकेलिप्टस के पेड़ काटने की भी किसानों ने दी अनुमति
संवाद न्यूज एजेंसी
कादरचौक। ककोड़ा गंगा मेले की तैयारियां तेज हो गई हैं। सड़कें बननीं शुरू होने के साथ ही गंगा किनारे बसे गांवों के किसानों ने भी मेला स्थल और उसके आसपास के खेतों में खड़ी फसलों को समेटना शुरू कर दिया है। खेत जल्दी खाली करने के लिए किसानों ने गन्ने की कटाई करने के साथ ही शकरकंद की भी खोदाई शुरू कर दी है।
ककोड़ा गंगा मेला कार्तिक पूर्णिमा पर लगता है, मेले में बदायूं के अलावा बरेली, शाहजहांपुर, संभल, कासगंज और आसपास के जिलों से लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं। कुछ दिनों में मेला प्रशासन की ओर से उनके खेतों में अस्थायी सड़कें, मीना बाजार, दुकानें, पार्किंग और अन्य व्यवस्थाएं बनाई जाएंगी।
मेले की व्यवस्थाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती खेतों की मेड़ों पर लगे यूकेलिप्टस के पेड़ बन रहे हैं। ऐसे में किसान समय रहते अपनी फसल काटकर खेत खाली कर रहे हैं। वहीं उन्होंने यूकेलिप्टस के पेड़ों को काटने की भी अनुमति दे दी है। ताकि मेले की तैयारियों में किसी तरह की बाधा न आए।

उधर, मेला की व्यवस्था देख रहे जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि मेला स्थल पर कुछ स्थानों पर यूकेलिप्टस के पेड़ आ रहे थे। संबंधित किसानों से बात की गई तो उन्होंने खुद ही पेड़ हटाने पर सहमति जताई है। मेला शुरू होने से पहले जमीन उपलब्ध कराने में किसान पूरा सहयोग कर रहे हैं।
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