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Hamirpur (Himachal) News: अब मौतों के असली कारणों का पता लगाएगा स्वास्थ्य विभाग, हमीरपुर में शुरू हुई विशेष पहल
Sat, 31 Oct 2026 01:51 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sat, 31 Oct 2026 01:51 AM IST
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से हमीरपुर में आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में भाग लेते प्रतिभाग
हमीरपुर। जिले में अब मौतों के पीछे छिपे वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विशेष पहल शुरू की गई है। इसके तहत मृतकों के परिजनों से बातचीत कर मृत्यु से पहले के लक्षणों, बीमारी और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों की जानकारी जुटाई जाएगी।
एकत्रित आंकड़ों के वैज्ञानिक विश्लेषण से पता लगाया जाएगा कि जिले के किन क्षेत्रों में कौन-सी बीमारियां अधिक जानलेवा साबित हो रही हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली की इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए हिमाचल प्रदेश से जिला हमीरपुर का चयन किया गया है।
इसी कड़ी में शुक्रवार को हमीरपुर में मृत्यु के कारणों की पहचान और सटीक आंकड़ों के संकलन को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इसका शुभारंभ जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अजय अत्री ने किया।
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एम्स नई दिल्ली की टीम के सदस्य डॉ. अनमोल दौलत, डॉ. आकांक्षा वर्मा और आशीष सिंह ने सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को परियोजना के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी।
डॉ. अनमोल दौलत ने बताया कि यह परियोजना देश के 18 राज्यों में संचालित की जा रही है। इसके तहत प्रत्येक राज्य से एक जिले का चयन किया गया है।
इस दौरान डॉ. अभिलाष सूद, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, सामुदायिक चिकित्सा विभाग, डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर, जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. नेहा पटियाल तथा जन शिक्षा एवं सम्प्रेषण अधिकारी सुनील कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे।
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घर जाकर परिजनों से पूछे जाएंगे मौत से जुड़े सवाल
डॉ. आकांक्षा वर्मा ने वर्बल ऑटोप्सी (मौखिक शव परीक्षण) की प्रक्रिया समझाते हुए बताया कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के कुछ दिनों बाद संबंधित सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी मृतक के घर जाकर परिजनों से बातचीत करेंगे। इस दौरान मृत्यु से पहले दिखाई देने वाले लक्षणों, बीमारी और अन्य स्वास्थ्य परिस्थितियों के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। इसके आधार पर मृत्यु के संभावित कारणों का विवरण दिगित्व ऐप में दर्ज किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित टूल्स का इस्तेमाल किया जाएगा।
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आंकड़ों से बनेगी बेहतर स्वास्थ्य योजनाओं की राह
इस परियोजना का उद्देश्य केवल मृत्यु का रिकॉर्ड तैयार करना नहीं, बल्कि समुदाय स्तर पर मृत्यु के वास्तविक संभावित कारणों से जुड़े विश्वसनीय आंकड़े जुटाना और उनका वैज्ञानिक विश्लेषण करना है। इससे यह पहचानने में मदद मिलेगी कि जिले के किन क्षेत्रों में किन बीमारियों या स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अधिक मौतें हो रही हैं। इन आंकड़ों के आधार पर स्वास्थ्य विभाग क्षेत्र विशेष की जरूरतों को समझ सकेगा और भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं, जागरूकता अभियानों तथा सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं को अधिक प्रभावी तरीके से तैयार कर सकेगा।
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एकत्रित आंकड़ों के वैज्ञानिक विश्लेषण से पता लगाया जाएगा कि जिले के किन क्षेत्रों में कौन-सी बीमारियां अधिक जानलेवा साबित हो रही हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली की इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए हिमाचल प्रदेश से जिला हमीरपुर का चयन किया गया है।
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इसी कड़ी में शुक्रवार को हमीरपुर में मृत्यु के कारणों की पहचान और सटीक आंकड़ों के संकलन को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इसका शुभारंभ जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अजय अत्री ने किया।
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एम्स नई दिल्ली की टीम के सदस्य डॉ. अनमोल दौलत, डॉ. आकांक्षा वर्मा और आशीष सिंह ने सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को परियोजना के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी।
डॉ. अनमोल दौलत ने बताया कि यह परियोजना देश के 18 राज्यों में संचालित की जा रही है। इसके तहत प्रत्येक राज्य से एक जिले का चयन किया गया है।
इस दौरान डॉ. अभिलाष सूद, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, सामुदायिक चिकित्सा विभाग, डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर, जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. नेहा पटियाल तथा जन शिक्षा एवं सम्प्रेषण अधिकारी सुनील कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे।
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घर जाकर परिजनों से पूछे जाएंगे मौत से जुड़े सवाल
डॉ. आकांक्षा वर्मा ने वर्बल ऑटोप्सी (मौखिक शव परीक्षण) की प्रक्रिया समझाते हुए बताया कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के कुछ दिनों बाद संबंधित सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी मृतक के घर जाकर परिजनों से बातचीत करेंगे। इस दौरान मृत्यु से पहले दिखाई देने वाले लक्षणों, बीमारी और अन्य स्वास्थ्य परिस्थितियों के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। इसके आधार पर मृत्यु के संभावित कारणों का विवरण दिगित्व ऐप में दर्ज किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित टूल्स का इस्तेमाल किया जाएगा।
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आंकड़ों से बनेगी बेहतर स्वास्थ्य योजनाओं की राह
इस परियोजना का उद्देश्य केवल मृत्यु का रिकॉर्ड तैयार करना नहीं, बल्कि समुदाय स्तर पर मृत्यु के वास्तविक संभावित कारणों से जुड़े विश्वसनीय आंकड़े जुटाना और उनका वैज्ञानिक विश्लेषण करना है। इससे यह पहचानने में मदद मिलेगी कि जिले के किन क्षेत्रों में किन बीमारियों या स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अधिक मौतें हो रही हैं। इन आंकड़ों के आधार पर स्वास्थ्य विभाग क्षेत्र विशेष की जरूरतों को समझ सकेगा और भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं, जागरूकता अभियानों तथा सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं को अधिक प्रभावी तरीके से तैयार कर सकेगा।