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Mandi News: दो आरोपियों की जमानत खारिज, पुलिस अधिकारी की भूमिका की जांच के आदेश
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मंडी। 500 ग्राम चरस के साथ पकड़े गए दो आरोपियों को अदालत से राहत नहीं मिली है। विशेष न्यायाधीश सरकाघाट की अदालत ने उनकी नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। वहीं, एक आरोपी की पूर्व सजा का उल्लेख न होने पर पुलिस अधिकारी के आचरण की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
आरोपी भीम सिंह कलगहेड़ निवासी और लाल सिंह पटान तहसील पधर निवासी हैं। पुलिस के अनुसार, 28 सितंबर 2026 को जोगिंद्रनगर पुलिस ने कार्रवाई की थी। 33 केवी भराड़ू के पास नाकाबंदी के दौरान एक गाड़ी को रोका गया था। तलाशी में गाड़ी के डैशबोर्ड में रखे काले बैग से 500 ग्राम चरस बरामद हुई थी। इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस का आरोप है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने चरस स्वयं तैयार करने की बात स्वीकार की। उन्होंने इसे बेचने के लिए ग्राहक तलाशने की बात भी कही थी। अदालत ने उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जमानत याचिकाएं खारिज कीं।
पूर्व सजा छिपाने पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान सामने आया कि आरोपी लाल सिंह को पहले भी सजा हो चुकी है। उसे 29 मार्च 2025 को एनडीपीएस के एक अन्य मामले में तीन साल एक माह की सजा मिली थी। यह तथ्य उसकी जमानत याचिका में भी दर्ज था। इसके बावजूद अभियोजन पक्ष ने दाखिल जवाब में संबंधित प्राथमिकी को लंबित बताया। अदालत ने इस चूक पर सवाल उठाया कि यह अनजाने में हुई या जानबूझकर।
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न्यायालय ने पुलिस अधीक्षक को संबंधित पुलिस अधिकारी के आचरण की जांच करने के लिए कहा है। जरूरत पड़ने पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं। पुलिस अधीक्षक को संदर्भ प्राप्त होने के 30 दिन के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी।
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आरोपी भीम सिंह कलगहेड़ निवासी और लाल सिंह पटान तहसील पधर निवासी हैं। पुलिस के अनुसार, 28 सितंबर 2026 को जोगिंद्रनगर पुलिस ने कार्रवाई की थी। 33 केवी भराड़ू के पास नाकाबंदी के दौरान एक गाड़ी को रोका गया था। तलाशी में गाड़ी के डैशबोर्ड में रखे काले बैग से 500 ग्राम चरस बरामद हुई थी। इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस का आरोप है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने चरस स्वयं तैयार करने की बात स्वीकार की। उन्होंने इसे बेचने के लिए ग्राहक तलाशने की बात भी कही थी। अदालत ने उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जमानत याचिकाएं खारिज कीं।
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पूर्व सजा छिपाने पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान सामने आया कि आरोपी लाल सिंह को पहले भी सजा हो चुकी है। उसे 29 मार्च 2025 को एनडीपीएस के एक अन्य मामले में तीन साल एक माह की सजा मिली थी। यह तथ्य उसकी जमानत याचिका में भी दर्ज था। इसके बावजूद अभियोजन पक्ष ने दाखिल जवाब में संबंधित प्राथमिकी को लंबित बताया। अदालत ने इस चूक पर सवाल उठाया कि यह अनजाने में हुई या जानबूझकर।
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न्यायालय ने पुलिस अधीक्षक को संबंधित पुलिस अधिकारी के आचरण की जांच करने के लिए कहा है। जरूरत पड़ने पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं। पुलिस अधीक्षक को संदर्भ प्राप्त होने के 30 दिन के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी।