सड़क दुर्घटना में घायल सॉफ्टवेयर इंजीनियर के ब्रेन डेथ की पुष्टि होने के बाद परिजनों ने उनके अंगदान का फैसला लिया। प्रशासन ने अंगों को समय पर पहुंचाने के लिए दो ग्रीन कॉरिडोर बनाए। हार्ट और लिवर को एयर एम्बुलेंस के माध्यम से अहमदाबाद भेजा गया। वहीं, दोनों किडनी जबलपुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाई गईं। सॉफ्टवेयर इंजीनियर की आंखें और त्वचा भी दान की गई हैं।
गुप्तेश्वर क्षेत्र निवासी नरेंद्र कुमार रजक एचसीएल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। वह 31 अक्टूबर को गंगाजलि कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मनखेड़ी गए हुए थे। घर लौटते समय वह सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए। हादसे के बाद उन्हें उपचार के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया था। नरेंद्र कुमार रजक के परिवार में पत्नी पूजा के अलावा 12 वर्षीय बेटी और आठ वर्षीय बेटा देवांश हैं। डॉक्टरों की सलाह के बाद परिजनों ने उनके अंगदान का फैसला लिया।
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हार्ट और लिवर अहमदाबाद भेजे गए
प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद डॉक्टरों की विशेष टीम ने अंगदान की प्रक्रिया पूरी की। उनके हृदय और लिवर को एयर एम्बुलेंस के माध्यम से अहमदाबाद भेजा गया। वहीं, दोनों किडनी जबलपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाई गईं। एक किडनी का प्रत्यारोपण शासकीय मेडिकल कॉलेज में किया जाएगा, जबकि दूसरी किडनी का प्रत्यारोपण निजी अस्पताल में होगा।
दो ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए
अंगों को समय पर अस्पताल और एयरपोर्ट तक पहुंचाने के लिए प्रशासन ने दो ग्रीन कॉरिडोर बनाए। निजी अस्पताल से डुमना एयरपोर्ट तक करीब 16 किलोमीटर और मेडिकल कॉलेज अस्पताल तक करीब 8 किलोमीटर का ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। इसके माध्यम से अंगों को निर्धारित स्थानों तक पहुंचाया गया। सॉफ्टवेयर इंजीनियर नरेंद्र कुमार रजक का अंतिम संस्कार गार्ड ऑफ ऑनर के साथ किया गया।